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एक पिता की बेबसी
झारखंड से सामने आई यह तस्वीर मानवता को झकझोर देने वाली है।
एक गरीब पिता को अपने मासूम बेटे के शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई।
अस्पताल प्रशासन द्वारा कोई व्यवस्था न होने पर मजबूर पिता ने मात्र ₹20 का एक थैला खरीदा और अपने बेटे के पार्थिव शरीर को उसी में रखकर बस से घर ले जाना पड़ा।
यह सिर्फ एक दर्दनाक घटना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
क्या गरीब को मरने के बाद भी सम्मान नहीं मिलना चाहिए?
क्या सरकारी योजनाएँ सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं?
आखिर कब तक आम आदमी सिस्टम की नाकामी का बोझ उठाएगा?
यह घटना बताती है कि विकास के दावों के बीच बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ अब भी ज़मीन पर अधूरी हैं।
प्रशासन और सरकार को इस व्यवस्था की तु
समीक्षा कर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
दुखद। निंदनीय। और बेहद चिंताजनक।